वो लड़की
वो वैसी ही थी
बिल्कुल छोटी बच्चियों जैसी
अपने में मगन..फ्रॉक पहने, दोनों चोटियां,
जिनके अंतिम हिस्से पर
गुलाबी रिब्बन बंधे हों.. इधर-उधर लहराती हुई,
दबंग सी, धूल मिट्टी में खेलती हुई...अकेली।
बस अपने बालू के घर बनाती और बिगाड़ती हुई...
और कभी-कभी
खेलते-खेलते न जाने कब सो जाने वाली
इस तरह अपने ही भीतर के झंझावातों से
ताकत बटोरती हुई
और ज़िंदगी में आगे बढ़ जाती हुई।
वो वैसी ही थी
नोएडा की लड़कियां
नोएडा की लड़कियां
दिल्ली के दफ्तर को
शेयरिंग वाले ऑटो से
रेज़गारी के लिए झगड़ती
भागमभाग वाले मेकअप में
मेट्रो की लाइन तोड़ती
कंधे का बैग पटकती
आगे बढ़ती हैं
नोएडा की लड़कियां
कभी-कभी मेट्रो में
सीट के लिए लड़तीं
और कभी-कभी
दूसरे को यूं ही
अपनी जगह दे देतीं
दफ्तर तक का सफर
मेसेंजर और व्हाट्सअप
पर करतीं
मुस्कुराते हुए मेसेज करती
फिर कोई मेसेज पढ़
बिना बात
झूम भी उठतीं हैं
नोएडा की लड़कियां
शाम ढले
तन पर दिन भर की
चिपकी घूरती निगाहों को
पीठ पर लादे
जब घर लौटती हैं
नोएडा की लड़कियां
तब आप देख सकते हैं
उनके बदन पर लटके
असंख्य,अदृश्य
गोल्ड मेडल
कल सुबह फिर निकलेंगी
नोएडा की लड़कियां
राकेश त्रिपाठी
नवंबर से नवंबर तक

सुनो सुनयना
मेरे भी दाहिने पैर के अंगूठे के पीछे
की हड्डी में
एक बरमूडा निकल आया है
ठीक वैसे ही
जैसे तुम्हारे पैरों में है
ये इस बात की
तस्दीक़ करता है कि
किन्ही दो लोगों का सब कुछ
सब कुछ का मतलब 'सब कुछ'
एक जैसा हो सकता है
दुख-सुख, रेगिस्तान औ हरियालियाँ,
उनका गुस्सा, खीझ और चिल्लाहट
खत्म हो जाने की हद तक
प्यार करने और दुश्मनी निभाने
की इच्छाएं
यहां तक कि
सांस लेने और छोड़ने का
सलीका भी
एक जैसा होता है
बशर्ते ....
मोहब्बत उनकी रगों
मोहब्बत उनकी रगों
में दौड़ती फिरती हो
- राकेश त्रिपाठी
सज़ा
सज़ा के हक़दार भी
बड़ी ग़लतियां की हैं
तुम्हारे इस अंदाज़ ने
तुमने एक लम्हे को
इतिहास बनने
से रोक दिया था ना
अपने क्षणिक अहंकार
पर सवार तुम
पास से गुज़र गए
नि:शब्द
शब्दों के ग़रीब थे तुम
मेरे करीब थे
फिर भी इतिहास की ह्त्या
के अपराधी तो हो ही
कोख में मारा था ना तुमने
उसे
ख़ैर ....सज़ा ये है
कि जिसे मारा था
उसे ज़िंदा करो, प्यार से पालो
और फिर उसे पा लो
वो सिर्फ तुम्हारा था
तुम्हारा ही है
सदैव
--रा.त्रि
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