क्या करते हो यार पिताजी?
कहां गई वह धार पिताजी?
कैसे सब स्वीकार पिताजी?
क्यों भूले ललकार पिताजी?
क्यों इतने लाचार पिताजी?
चश्मा और अखबार पिताजी
कोठी कपड़े कार पिताजी?
अपने घर के द्वार पिताजी?
मैं भी हूं अब 'यार पिताजी'
एक के भीतर चार, पिताजी
चलता है घर बार पिताजी
हर दिन मचती मार पिताजी।
इस सब का क्या सार पिताजी?
यह कैसा संसार पिताजी?
कोई इसका पार पिताजी?
बतलाओ उपचार पिताजी।
कहने को परिवार पिताजी
फिर क्यों इतने भार पिताजी?
कितनी हैं दीवार पिताजी
कैसे हों 'तैयार' पिताजी?
खिंचे-खिंचे क्यों तार पिताजी?
ये कैसा बाज़ार पिताजी?
हर का जो श्रृंगार पिताजी
बिखरे हर-सिंगार पिताजी?
जीवन भर बेगार पिताजी
उत्तर का अधिकार पिताजी
दोनों को है प्यार पिताजी।
फिर क्यों है अंगार पिताजी?
- देवेश खबरी
9 अक्टूबर 2026, रात 12.19 बजे





