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जो बीत गई सो बात गई




जो बीत गई सो बात गयी


जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया

अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गये फ़िर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मचाता है

जो बीत गई सो बात गई


जीवन में वह् था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियां
मुर्झाईं कितनी वल्लरियां
जो मुर्झाईं फ़िर कहां खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई


मृदु मिट्टी के हैं बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आये हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अंदर
मधु घट हैं मधु के प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वो मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है

जो बीत गई सो बात गई


-डा. हरिवंशराय बच्चन

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4 comments:

Udan Tashtari said...

आभार इस रचना को प्रस्तुत करने का.

Anonymous said...

'वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर..'
बचपन में स्कूल के सिलेबस में ये कविता पढ़ी..लेकिन असल अर्थ तक पहुंचने की प्रक्रिया अब तक जारी है..!

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

mera bhi aabahar iss rachna ke liye. maine bhi khana tha ki jo beet gayi so baat gayi. ek umar dhuan hone ko hai. wo prem pyar wo preet gayi. ek soona ghar unchi khirdki woh nanhi si chotti lardki rato ko tumhe jagati hai meetha sa geet sunaati hai.woh ab bhi tujhe bulati hai.
apni pahchan chupati hai. kahne sunne ki har hasrat dil hi dil mai reet gayi oh bachpan ke meet mere
jo beet gayi so baat gayi.