Monday, November 14, 2016

बंधन नाकाम


बांध दो मुझे 
तारों की कंटीली बाड़ में
फिर ऊंची दीवारें खड़ी करो
मेरे आस-पास..... 
ध्यान रहे 
सूरज की रोशनी का
एक कतरा भी
न पहुंचे मेरे माथे तक
और हां....
रोकना न भूलना
हवा के रास्ते भी
लेकिन....
थाम नहीं सकते
तुम वो तूफान
जो मेरे भीतर हरहराता है
रोज़ सुबह शाम


--रा.त्रि

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