Monday, November 14, 2016

तुम साथ हो सदैव

चल देंगे फिर 
एक दिन कमंडल उठा कर
उठा लेंगे डेरा-डंडा
खोल देंगे जटाएं 
बैठ जाएंगे गंगा किनारे
धूनी रमाए
लेकिन
याद रहे...
हम अकेले नहीं हैं
तुम मेरे कमंडल में हो
गंगा जल की तरह
सदैव


--रा.त्रि

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